1998 की इस घटना के बारे में बताते हुए रोहित परिहार ने बताया कि 26 सितंबर की शाम को शिकार की तलाश शुरू की गई थी, फिल्म की टीम जोधपुर के उम्मेद पैलेस में ठहरी हुई थी। इस दौरान यात्रा का मैनेजमेंट देखने वाले दुष्यंत सिंह ने ड्राइवर हरीश कुमार दुलानी को होटल के मेहमानों को बाहर घूमाने के लिए कहा था। जिसके बाद रात तकरीबन 10 बजे सलमान खान ने कहा कि वह खुद ड्राइव करेंगे और वह सतीश शाह के साथ आगे गाड़ी में बैठकर घूमने निकले थे। इस दौरान उनके साथ पीछे चार और लोग के साथ दुलानी भी बैठे थे।गाड़ी में पीछे बैठे एक व्यक्ति का नाम यशपाल था, जिसने सलमान खान को भवाद गांव जाने को कहा, जोकि उम्मेद पैलेस से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर था। कोर्ट में अपने बयान में ड्राईवर दुलानी ने कहा कि सलमान ने पहले दो बार फायर किया था, लेकिन शिकार मिस हो गया था। जिसके बाद सतीश शाह ने कहा था कि जमा के लगाओ और तीसरा शॉट चिंकारा को लग गया। इसके बाद सलमान गाड़ी से उतरे और उन्होंने चिंकारा की गर्दन को काट दिया और चिंकारा को लेकर सब लोग वापस होटल लौट आए थे।शिकार के बाद यशपाल जिप्सी को दूसरे होटल लेकर गाए और तकरीबन 2.30 बजे रात को होटल का किचन खुलवाया गया। जिसके बाद बाद होटल के मालिक और कुक को चिंकारा का मीट बनाने के अपराध में गिरफ्तार किया गया था। आपको बता दें कि इस मामले में सलमान खान के खिलाफ 2006 में कोर्ट ने सजा सुनाई थी, लेकिन जेल में 5 दिन बिताने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी और बाद में उन्हें इस मामले से बरी कर दिया गया था।