..तो 53 विधायकों के वोट हो जाएंगे निरस्त और क्या गणित बिठाने में जुटी है BJP पढ़े पूरी खबर लिंक पर :-
महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस को चौंकाते हुए देवेंद्र फडणवीस ने भले ही अचानक सीएम पद की शपथ ले ली हो, लेकिन अब बहुमत साबित करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। एक तरफ बीजेपी विपक्षी खेमे के विधायकों को साधने की कोशिश में है तो दूसरी ओर एक-एक सदस्य को होटलों में रखा जा रहा है।संवैधानिक मामलों के जानकार व सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता ने कहा, ‘फ्लोर टेस्ट के दौरान यदि अजित पवार और जयंत पाटिल (नए विधायक दल नेता) दोनों ने विप जारी कर दिया तो बहुमत की संख्या में विवाद के साथ दलबदल का मामला भी बनेगा। उस स्थिति में स्पीकर की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बहुमत, स्पीकर का चुनाव और दलबदल जैसे मामलों पर विवाद की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट में अगले राउंड में फिर से मामला आ सकता है।विराग गुप्ता ने आगे कहा, ‘अजित पवार के विप को दो बिंदुओं पर वैधता मिल सकती है। मसलन, शरद पवार ने उन्हें विधायक दल के नेता के पद से हटाया है, मगर पार्टी से नहीं हटाया है। दूसरी तरफ तीन दलों द्वारा जिस महाविकास अघाडी गठबंधन की सरकार बनाने की बात की जा रही है, उसके नेता के बारे में औपचारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट को नहीं बताया गया।’एनसीपी के कुल 54 विधायक हैं। अगर स्पीकर ने अजित पवार का विप माना तो फिर उनके फैसले के खिलाफ जाने वाले 53 अन्य विधायकों के वोट निरस्त हो जाएंगे। इससे बहुमत के लिए आंकड़ा 118 रह जाएगा। इतने विधायकों का बंदोबस्त फिलहाल बीजेपी के पास है। बीजेपी के पास अपने 105 और 13 निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा किया गया है। देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में पिछले दिनों हुई बैठक में 118 विधायक मौजूद रहे हैं।बीजेपी के नेताओं का मानना है कि शपथ से पहले अजित पवार ने विधायक दल के नेता की हैसियत से समर्थन पत्र दिया था, इस नाते कानूनी पेच नहीं फंसता। महाराष्ट्र में सरकार तो बन गई, पर क्या स्थिर रह पाएगी, इस सवाल पर बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा, ‘अजित पवार विधायक दल के नेता की हैसियत से बीजेपी को समर्थन दिए, जिससे बीजेपी के विधायक दल के नेता देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने, कहीं कोई रोड़ा नहीं है। सदन में पार्टी बहुमत साबित करके रहेगी।’