23 मई को नरेंद्र मोदी के पक्ष में आए प्रचंड जनादेश की चर्चा देश और विदेश में बड़े कौतूहल से हो रही है। सभी राजनीतिक गणित के समीकरणों को मोदी और जनता के बीच की केमिस्ट्री ने ध्वस्त कर दिया है। चुनावों के समय जनता और लोकतंत्र के कारक ग्रह शनि का धर्म और आश्चर्य के कारक ग्रह केतु से युति करना एक बेहद चौंकाने वाले नतीजों का कारण बना। लोकसभा में लगभग दो-तिहाई बहुमत से जीत कर आई बीजेपी गठबंधन के महानायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 मई को गुरुवार के दिन शाम 7 बजे शपथ लेंगे।धरती के करीब सूर्य, नौतपा में 7 दिन और तपेंगे आपप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण के समय वृश्चिक लग्न उदय हो रहा होगा जो कि संयोग से उनका जन्म लग्न और उनकी जन्म राशि भी है। वृश्चिक लग्न की शपथ ग्रहण कुंडली के लग्न में बैठे गुरु पंचमेश हैं और उन पर सप्तम भाव से दशमेश सूर्य और अष्टमेश बुध की दृष्टि मिले-जुले प्रभाव की है।राजयोग में मोदी लेंगे शपथइस योग के प्रभाव से अगले कुछ महीनों में केंद्र सरकार हजारों की संख्या में रिक्त पदों को भरने के लिए नई नौकरियां निकालेगी। किन्तु इस प्रक्रिया में कुछ विवाद भी पैदा हो सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और भारत दोनों की कुंडलियों में चन्द्रमा की महादशा चल रही है। संयोग से मोदी सरकार के शपथ ग्रहण के समय चन्द्रमा मीन राशि में होकर गुरु से दृष्ट होंगे जो कि एक बड़ा राजयोग है।इन विषयों पर रहेगा सरकार का ध्यानशपथ ग्रहण के समय शिक्षा और मनोरंजन के पंचम भाव में बैठे चन्द्रमा पर गुरु की दृष्टि से देश में उच्च शिक्षा के नए केंद्र, होटल, पार्क, अस्पताल, दवा-केंद्रों की बड़े पैमाने पर केंद्र सरकार की ओर से स्थापना की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण के समय चन्द्रमा रेवती नक्षत्र में हैं जो कि शिक्षा, खेल-कूद और मनोरंजन के कारक ग्रह बुध का नक्षत्र है। अपने दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी इन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देंगे। मोदी सरकार नए एयरपोर्ट बनाने और रेलवे की सुविधाएं बढ़ाने पर भी अधिक खर्च करेगी। किन्तु किसानों की स्थिति सुधरने में अभी कुछ समय लगेगा।इसलिए राहुकाल से डरते हैं दक्षिण के नेता, जानें क्या होता है इसका प्रभावआखिर मोदी सरकार ने क्यों चुना शाम का समयइस दिन मध्याह्न से पूर्व पंचक लगा हुआ है। इसके बाद 01 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक राहुकाल है। चौघड़िया के हिसाब से 3 बजकर 55 मिनट से अशुभ काल चौघड़िया शुरू हो रहा है जो शाम 5 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगा और शुभ चौघड़िया आरंभ होगा जो शाम 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसलिए संध्या का समय कुल मिलाकर 30 मई को शुभ है।इसे विस्तार से और समझें तो सूर्यास्‍त से लगभग 24 मिनट पहले के समय को ‘गोधूलि’ महूर्त कहा जाता है। यह महूर्त कई अशुभ योगों को दूर रखने वाला माना जाता है, किन्तु इसकी भी अपनी सीमाएं हैं। चूंकि इस समय आजाद भारत और प्रधानमंत्री मोदी दोनों की कुंडली के 2 / 8 के अक्ष पर सभी अशुभ ग्रहों जैसे शनि, केतु, मंगल और राहु का प्रभाव है जो कि किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा और बड़े राजनेता के साथ अनहोनी का  संकेत भी दे रहा है।शपथ ग्रहण के समय दूसरे घर में धनु राशि में गोचर कर रहे शनि और केतु तथा मृत्यु स्थान यानी अष्टम भाव में पड़े राहु और मंगल बेहद अशुभ हैं। इस योग के कारण सरकार को अगले कुछ महीनों में असामान्य मानसून, किसी बड़े नेता के साथ अनहोनी और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से कठिन स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।",