बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) को झटका दिया है. सोमवार को मायावती ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश में होने वाले अगले उप-चुनावों में उनकी पार्टी किसी का समर्थन नहीं करेगी. गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनावों में बसपा के समर्थन से जीतने के बाद कैराना और नूरपुर के उप-चुनावों में भी सपा मायावती से उम्मीद लगा रही थी. लेकिन मायावती ने साफ संकेत दे दिया है कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले उप-चुनाव सपा को अपने दम पर लड़ने होंगे.
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक सोमवार को मायावती ने बसपा के जिला और क्षेत्रीय संयोजकों के साथ एक बैठक की. इसके बाद जारी किए गए एक प्रेस नोट में कहा गया है, 'गोरखपुर और फूलपुर के बाद बसपा भविष्य के किसी उप-चुनाव के लिए सक्रिय नहीं रहेगी.'
बसपा की यह घोषणा तीन दिन पहले हुए राज्यसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार की हार के बाद आई है. उस समय मायावती ने सपा के प्रयासों को लेकर संतोष जताया था, लेकिन उसके बाद शनिवार को उन्होंने कहा था कि बसपा उम्मीदवार को जिताने के लिए विधायक रघुराज प्रताप सिंह पर निर्भर होकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राजनीतिक अपरिपक्वता दिखाई है. मायावती ने यह भी कहा था कि अगर वे अखिलेश की जगह होतीं तो बसपा उम्मीदवार को प्राथमिकता देतीं.
आगामी उप-चुनावों को लेकर मायावती के ताजा फैसले पर पार्टी के अंदर के एक सूत्र ने बताया कि यह एक रणनीति के तहत किया गया है. कैराना लोकसभा सीट पर होने वाले उप-चुनाव के लिए राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) पूर्व सांसद और पार्टी के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को मैदान में उतार सकता है. इस सूत्र के मुताबिक अगर मायावती सपा का समर्थन करतीं तो जाट वोटों के उससे दूर होने का खतरा है. और अगर वे आरएलडी को समर्थन देतीं तो इसका मुस्लिम वोटरों पर विपरीत असर पड़ता. इसलिए उसने बीच का रास्ता अपनाया है.
वहीं, सोमवार की बैठक को लेकर कहा जा रहा है कि पार्टी के लोगों से बातचीत के दौरान मायावती ने कहा कि 2019 में भाजपा को केंद्र में वापसी करने से रोकने के लिए बसपा, सपा और अन्य सभी राजनीतिक दलों को एक साथ आना चाहिए. रिपोर्ट के मुताबिक मायावती ने पार्टी के लोगों से कहा, 'हमने देश और नागरिकों की भलाई के लिए गठबंधन बनाए रखने का फैसला किया है. भाजपा लोगों को बसपा और सपा के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर सकती है लेकिन वह असफल रहेगी. हमें और दूसरी पार्टियों को एक साथ आना होगा ताकि भाजपा सत्ता में वापस न आ सके.'