-ई-वे बिल सिस्टम और ई-वे बिल सिस्टम मोबाइल एप्प 1 फरवरी 2018 से पूरे भारत में लागू कर दिया जाएगा।
-अगर कोई बस्‍तु राज्‍य की सीमा से बाहर जा रही है तो सप्‍लायर को इंटर स्टेट ई-वे बिल बनवाना होगा
-अगर खरीददार कोई जानकारी नहीं देता है तो उस बस्‍तु को खरीदा ही माना जाऐगा
-इस प्रणाली के तहत 50000 रूपये या उससे अधिक कीमत का कोई सामान राज्‍य या राज्य से बाहर भेजा जाता है
-तो पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए सरकार को बताना होगा
-इस प्रणाली के तहत सप्लायर और खरीददार को दोनों को ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन करना होगा
-इस बिल प्रणाली में कॉन्ट्रासेप्टिव, ज्युडिशियल और नॉन ज्युडिशियल स्टैंप पेपर, न्यूजपेपर, ज्वैलरी, खादी, रॉ सिल्क, इंडियन फ्लैग, ह्युमन हेयर, काजल, दिये, चेक, म्युनसिपल वेस्ट, पूजा सामग्री, एलपीजी, किरोसिन, हीटिंग एड्स और करेंसी को बाहर रखा गया
- ऐसा अनुमान है इस बिल के आने से सरकारी राजस्‍व में 20 प्रतिशत तक की बढोत्‍तरी होगी
- जब सप्‍लायर ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन करेगा तो एक यूनिक कोड जरनेट होगा
और यह यूनिक कोड खरीददार, सप्‍लायर और ट्रांसपोर्टर तीनो के लिए होगा
- जो बस्‍तुऐं जीएटी के दायरे में नहीं आती हैं उन पर भी ये बिल लागू होगा
- टैक्‍स चोरी को पूरी तरह से रोकने के लिए ई वे बिल प्रणाली को लागू किया जा रहा है
- यह प्रणाली ऑनलाइन होगी तो इससे लगभग प्रतिदिन 50 टन कागज की बचत होगी
- ये बिल 1 से 15 दिनों तक मान्‍य होगा और ये मान्‍यता सामान को ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगी
- राज्य के अंदर ही समान भेजने को इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा
- वहीं इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के लिए 1 जून 2018 से लागू करने का फैसला किया गया है