500 और 1000 रुपए के बंद हो चुके नोटों की लगातार होने वाली बरामदी की गुत्थी जांच एजेंसियों ने सुलझा ली है. जांच एजेंसियों की एक रिपोर्ट के मुताबिक जाली नोटों के कारोबार में लगे सिंडिकेट इन नोटों को गुपचुप तरीके से नेपाल पहुंचा रहे हैं. पाकिस्तान में मौजूद आईएसआई और डी कंपनी से जुड़े एजेंट पाक स्मगलर्स की मदद से इन नोटों को खरीद कर इसे कराची और पेशावर के प्रिंटिंग प्रेस में भेज रहे हैं.
कराची और पेशावर के प्रिंटिंग प्रेस में पाकिस्तानी नोटों की भी छपाई होती है. यहां मौजूद एक्सपर्ट भारतीय नोटों पर लगे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के सिक्योरिटी वायर को निकाल कर के नये 500, 2000 और 50 के जाली नोटों पर लगा देतें है, जिससे असली और नकली नोटों को पहचान पाना बेहद मुश्किल होता है. कराची और पेशावर से इन नये भारतीय जाली नोटों को एक बार फिर से डी कंपनी की मदद से दुबई और बंग्लादेश जैसे देशों में भेजा जाता है. स्मगलर्स की मदद से इन नोटों को भारत में पहुंचाया जाता है.
जांच एजेंसियों के मुताबिक में अलग-अलग राज्यों से लाखों रुपए के जाली नोट बरामद किये जा चुके हैं. इन जाली नोटों के कारोबार में लगे तस्करों से पूछताछ की गई तो पता चला कि वह पुराने भारतीय पुराने नोट को नेपाल भेजते हैं. जहां पर पाकिस्तानी स्मगलर उन्हें इसके बदले पैसे देते हैं.
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अब जांच एजेंसियां ये पता करने में लगी हुई है कि जब से सरकार ने नोटबंदी का फैसला किया है तब से अब तक कितनी मात्रा में पुराने नोटों को नेपाल या दूसरे देशों में भेजा गया है. एनआईए फेक इंडियन करेंसी नोट यानि (FICN) की जांच कर रही है. सूत्रों मुताबिक जिन जाली नोटों को बरामद किया गया है उनकी क्वालिटी में काफी बदलाव आ रहा है और असली नकली का फर्क करना आम आदमी के लिए आसान नहीं है.